Monday, November 10, 2008

कोई यहाँ आया था

कल कोई यहाँ आया था
बीती रात किसी ने मेरा दरवाजा खटखटाया था
कोई मुसाफिर रास्ता भूल गया था शायद
इतना निंदासा था की चोखट पर ही ढेर हो गया
मंजिल भूल कर रस्ते पर ही सो गया पर
यही दरवाजे पर बैठी हु सुबह उठते ही रास्ता पूछेगा मै न मिली तो बीती रात ओर मुझे दोनों को कोसेगा
कल कोई यहाँ आया था

2 comments:

SACHIN KUMAR said...

koi yaha aaya tha------and also about blogger ko blogger hi rahne do.aacha tha. carry on

Unknown said...

koi aya tha to itna special ho gayaki poem likh di.....................
but its nice
carry on
my well wishes are always with u..............................